हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की पैदाईश

Barelvi.in
0

 हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की पैदाईशः

(toc)

अल्लाह तआला ने फ़रमाया बेशक हम ने तुम्हारे असल आदम को मिट्टी से पैदा किया । मज़ीद इरशाद फरमायाः

याद करो उस वक़्त को जब आप के रब ने फ़रिश्तों से कहा बेशक मैं एक बशर कीचड़ से बनाने वाला हूं इससे मुराद आदम अलैहिस्सलाम हैं।

Hazart Adam Alaihissalam Ki Paidaish
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की पैदाईश

इस मक़ाम पर बशर से मुराद ऐसा इंसान जो ज़ाहिर चमड़े वाला होगा। उस पर भेड़ों की तरह ऊन नहीं होगी बकरियों की तरह बाल नहीं होंगे, ऊंटों की मकसी (ऊन) की तरह भी ऊन नहीं होगी परिन्दों के परों की तरह पर नहीं होंगे और फलों की तरह उस पर कोई छिलका नहीं होगा।

बेशक हम ने इंसानों को चिपकती हुई मिट्टी से पैदा किया,

यहां भी मुराद इंसानों से उनके असल आदम अलैहिस्सलाम ही हैं।

बेशक हमने इंसान यानी आदम को स्याह खुश्क मुतग़य्यर कीचड़ से पैदा किया। सलसाल उस कीचड़ को कहते हैं जो खुश्क हो जाये खटकाने पर उससे आवाज़ आये स्याह कीचड़ को, हमा कहते हैं। जिसकी बू में तग़य्युर आ जाये उसे मस्नून कहते हैं।

(ads2)

इंसान यानी आदम को खुश्क बजने वाली ठीकरी की तरह के कीचड़ से पैदा किया। इन आयात से आदम अलैहिस्सलाम की पैदाईश के मुख़्तलिफ मराहिल का ज़िक्र किया गया है कि आपके जिस्मे अतहर के लिये पहले खुश्क मिट्टी को लाया गया फिर उसे गूंध कर कीचड़ बनाया गया फिर चिपकने वाली मिट्टी बनाया गया फिर उसे उसी तरह रहने दिया गया यहां तक कि वह खुश्क हो गई और बजने लगी और उसकी बू में भी तग़य्युर आ गया फिर और ज़्यादा रखने पर ठीकरी की तरह हो गई ।

जिस्मे आदम अलैहिस्सलाम के लिये मिट्टी ली गई:

आदम अलैहिस्सलाम के जिस्मे अतहर की तख़लीक के लिये मिट्टी लाने के लिये हज़रत जिब्राईल को ज़मीन पर भेजा गया। आप जब तशरीफ लाये तो ज़मीन से मिट्टी लेने का इरादा किया तो ज़मीन ने बड़ी आजिज़ी व इंकसारी और गिरया वुज़ारी से अर्ज़ किया कि मेरी मिट्टी से बनने वाले शख़्सों ने अगर खूंरेज़ियां कीं या वह जुर्म की वजह से जहन्नम में गये तो तकलीफ होगी। 

Hazart Adam Alaihissalam Ki Paidaish :

हज़रत जिब्राईल ज़मीन की आजिज़ी को देखकर वापस चले गये और अल्लाह तआला के हुजूर तमाम माजरा ब्यान कर दिया इसी तरह इस्राफील भी आकर वापस चले गये और मिकाईल भी आकर वापस चले गये। इन तमाम के बाद इज़ाईल आये। उनकी ख़िदमत में भी ज़मीन ने वही आजिजाना गुफ्तगू की लेकिन आपने कहा कि मैं तेरी बात तस्लीम करूं या अल्लाह तआला के हुक्म पर अमल करूं? मुझे अल्लाह तआला का हुक्म है इसलिये मुझे तो मिट्टी ज़रूर ही लेकर जाना है, आपने ज़मीन की इंकिसारी की तरफ कोई तवज्जोह नहीं दी बल्कि इरशादे बारीतआला के मुताबिक ज़मीन से मिट्टी लेकर रब तआला के हुजूर हाज़िर हो गये, इसी वजह से अल्लाह तआला ने रूह कब्ज़ करना भी उनके सुपुर्द किया कि ऐसा न हो कि जिब्राईल, मिकाईल, इस्राफील में से किसी के ज़िम्मे लगाया तो रूह कब्ज़ करने के लिये जायें तो उसके अकरबा को रोते हुए पाकर इसी तरह छोड़ कर न आ जायें ।

(ads2)

कैसी मिट्टी ली गई?

हज़रत अबू मूसा अशअरी से मरफूअ हदीस मरवी है:

बेशक अल्लाह तआला ने हुक्म दिया कि तमाम ज़मीन से एक मुट्ठी भर मिट्टी ले आओ। उस मिट्टी में हर किस्म के ज़र्रात शामिल किये गये सुर्ख रंग, सफेद रंग, स्याह रंग और उनके दर्मियान रंग वाली मिट्टी ली गई। इसी तरह कुछ मिट्टी नर्म ज़मीन से ली गई और कुछ सख़्त जमीन से ऐसे ही तैय्यब व ख़बीस मिट्टी को शामिल किया गया, जितने किस्म के रंगों वाली मिट्टी आपके जिस्म में लगाई गई आपकी औलाद में उतने ही रंग पाये जाते हैं इसी तरह कोई नर्म और कोई सख़्त दिल कोई नेक और कोई बुरे ।

(getButton) #text=(यह भी पढ़ें : आदम अलैहिस्सलाम को नाम सिखाए) #icon=(link) #color=(#2339bd)

बाज़ हज़रात ने ब्यान किया हज़रत आदम अलैहिस्सलाम कि मिट्टी में साठ क़िस्म के रंग शामिल थे वह तमाम आपकी औलाद में पाये जाते हैं । 

ज़मीन में चश्मे क्यों जारी हैं?

अल्लाह तआला ने जब हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को पैदा करने का इरादा फ़रमाया तो ज़मीन को बताया कि मैं तुझसे एक मखलूक पैदा करने वाला हूं जो मेरे मुतीअ होंगे उनको मैं जन्नत में दाखिल करूंगा और जो मेरे नाफ्रमान होंगे उनको मैं जहन्नम की आग में डाल दूंगा, यह सुनकर ज़मीन ने फिर पूछा ऐ अल्लाह मुझसे पैदा होने वाली मख़्लूक जहन्नम की आग में जायेगी? रब तआला ने फरमाया हां तो ज़मीन इतना रोई कि उसके रोने से चश्मे जारी हो गये जो कयामत तक जारी रहेंगे।

इंसान को खुशी कम और ग़म ज़्यादा क्यों ?

हज़रत इज़ाईल अलैहिस्सलाम जब मिट्टी को लाये तो उन्हें अल्लाह तआला ने हुक्म दिया कि इसे सफा मरवा पहाड़ियों के पास रख दो यानी वहां रख दो जहां आज कल काबा शरीफ है फिर रिश्तों को हुक्म दिया कि इसे मुख़्तलिफ़ पानियों से गारा बनायें फिर उस पर चालीस रोज़ बारिश हुई उन्तालीस दिन तो ग़म व रंज का पानी बरसा और एक दिन ख़ुशी का। इसलिये इंसान को रंज व ग़म ज़्यादा रहते हैं और खुशी कम । फिर उसे मुख़्तलिफ हवाओं से खुश्क करके खटकने वाली मिट्टी बनाकर अल्लाह तआला ने खुद अपनी कुदरते कामिला से आप के क़ालिब को तैयार किया ।

(ads2)

आदम अलैहिस्सलाम की सूरत देखकर रिश्ते हैरान हो गयेः

फरिश्तों ने कभी ऐसी सूरत नहीं देखी थी वह हैरान होकर उसके ईद गिर्द फिरते थे और उसकी ख़ूबसूरती पर ताज्जुब करते थे इबलीस को भी इसकी खबर हो चुकी थी, अभी तक वह मरदूद नहीं हुआ था, वह भी इस क़ालिब को देखने आया और इसके गिर्द फिर कर बोला, तुम इस पर ताज्जुब करते हो यह तो अंदर से एक ख़ाली जिस्म है जिस में जगह जगह सुराख़ हैं और इसकी कमज़ोरी का यह हाल है कि अगर भूका हो तो गिर पड़े और अगर खूब सैर हो जाये तो चल न सके, इस ख़ाली क़ालिब से कुछ न हो सकेगा, फिर कहने लगा हां इसके सीने की बायीं तरफ़ एक बंद कोठरी है यह ख़बर नहीं कि इसमें क्या है? शायद यही लतीफ़ए रब्बानी की जगह हो जिसकी वजह से यह ख़िलाफ़त का हक़दार हुआ हो ।

📗 तज़किरतुल अंबिया

Post a Comment

0Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.
Post a Comment (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top